Balrampur News: सरकारी लोन लेने की रखते हैं चाह तो पहले देख लीजिए कि इस बुज़ुर्ग के साथ क्या हुआ
बलरामपुर में सरकारी लोन दिलाने के नाम पर बुज़ुर्ग के साथ की धोखाधड़ी। डाइनामाइट न्यूज़ की इस रिपोर्ट में जानिए क्या है पूरा मामला

बलरामपुर: जिले के थाना रेहरा बाजार क्षेत्र में सरकारी लोन दिलवाने के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले चार अभियुक्तों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, थाना रेहरा बाजार के ग्राम केराडीह निवासी राम कृपालु उर्फ ननके ने तहरीर दी कि उनके साथ सरकारी लोन दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी कर उसकी जमीन का अनुबंध करवा लिया गया है। मामले की जानकारी होते ही पुलिस ने थाना रेहरा बाजार में मुकदमा पंजीकृत जांच शुरू की दी।
लोन दिलाने के नाम पर हुई धोखाधड़ी
राम कृपालु से सरकारी लोन के नाम पर उस समय धोखाधड़ी हुई जब वह अपने घर का निर्माण करवा रहा था। पैसों की कमी के कारण वह सरकारी लोन दिलाने के नाम पर झांसे में आ गया। बताया जा रहा है कि कृष्णमोहन पांडेय, विनय चतुर्वेदी, प्रह्लाद वर्मा और अरुण यादव ने षड्यंत्र रचकर उसकी जमीन का अनुबंध करवा लिया और उसके बाद खाते में एक लाख रुपए भेज दिए। जमीन अनुबंध कराने के बाद षड्यंत्रकारियों ने उसे जान से मारने की धमकी देते हुए दिये हुए एक लाख रुपये भी खाते से निकलवा कर वापस ले लिये।
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पुलिस ने की कार्यवाही
पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने बताया कि मामले की जांच कराए जाने पर यह मामला प्रकाश में आया कि अनपढ़ बुजुर्ग से सरकारी लोन दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी हुई है। पुलिस ने श्रावस्ती जिले के कटरा बाजार से आरोपी कृष्णमोहन पांडेय, विनय चतुर्वेदी, प्रह्लाद वर्मा और अरुण यादव को गिरफ्तार कर लिया है।
जमीन पर किया था कब्जा
एसपी विकास कुमार ने बताया कि अभियुक्तों ने पूछताछ के दौरान बताया कि हम लोगों ने सरकारी लोन दिलाने के नाम पर राम कृपाल की जमीन का धोखे से अनुबंध कराकर कब्जा कर लिया था। साथ ही रामकृपाल को जान से मारने की धमकी देकर बैंक से एक लाख रुपए भी वापस ले लिए थे।
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रजिस्ट्रार की भूमिका भी संदिग्ध
पूरे मामले में कहीं न कहीं रजिस्ट्रार की भूमिका संदिग्ध प्रतीत होती है क्योंकि ऐसे मामलों में रजिस्ट्रार की पूरी जिम्मेदारी होती है कि किसी तरह से जमीन खरीद या बेच में किसी के साथ धोखाधड़ी न हो। ऐसे में यदि रजिस्ट्रार ने सही से जांच कर कार्यवाही की होती तो बुजुर्ग व्यक्ति के साथ धोखाधड़ी न हुई होती।