कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर लगाया आरोप, रात के अंधेरे में CEC की नियुक्ति को बताया संविधान विरोधी
कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार को देश का नया मुख्य चुनाव आयुक्त बनाने पर सवाल उठाए हैं। पढ़ें डाइनामाइट न्यूज़ की पूरी रिपोर्ट

नई दिल्ली: कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने रात के अंधेरे में भारत के नए मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) की नियुक्ति की है, जो उनके अनुसार उच्चतम न्यायालय के आदेश और संविधान की भावना के खिलाफ है। पार्टी ने यह भी कहा कि सरकार ने यह निर्णय जानबूझकर जल्दबाजी में लिया, जिससे लोकतंत्र की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े होते हैं।
डाइनामाइट न्यूज़ संवादाता के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सोमवार शाम को हुई चयन समिति की बैठक में ज्ञानेश कुमार को भारत के नए मुख्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया। इस नियुक्ति के बाद कांग्रेस ने तीखा विरोध जताया है, और पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "सरकार ने आधी रात को नए मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की अधिसूचना जारी की, जो हमारे संविधान की भावना के खिलाफ है।"
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कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उच्चतम न्यायालय ने कई बार संविधान की इस भावना को कई मामलों में दोहराया है कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और शुचिता के लिए सीईसी को एक निष्पक्ष हितधारक होना चाहिए। वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि सरकार ने सीईसी के चयन से पहले उच्चतम न्यायालय की सुनवाई तक का इंतजार नहीं किया, जो 19 फरवरी को होनी थी। इस मामले में, सरकार की जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस ने कहा कि यह संवैधानिक प्रक्रिया को नजरअंदाज करना है।
इस विवादित नियुक्ति को लेकर कांग्रेस नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "मोदी सरकार चुनाव आयोग पर अपना नियंत्रण चाहती है, ताकि वह अपनी राजनीतिक मजबूती बनाए रख सके।" सिंघवी ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा सीईसी का चयन करने की प्रक्रिया पारदर्शी और संविधानिक तरीके से नहीं हुई, जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
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कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने सीईसी के चयन में न्यायपालिका और विपक्षी पार्टियों की राय को नजरअंदाज किया है, जो लोकतांत्रिक प्रणाली की गरिमा के खिलाफ है। कांग्रेस का कहना है कि यह कदम चुनावी स्वतंत्रता और निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि निर्वाचन आयोग के प्रमुख को सरकार द्वारा नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है।