धर्मात्मा निषाद ने सुसाइड से पहले किया ये काम, क्यों लिखा- मैं हत्यारा नहीं बनना चाहता? 1876 शब्दों की अंतिम पोस्ट के मायने
निषाद पार्टी के नेता धर्मात्मा निषाद सुसाइड केस को लेकर कई सवाल उठे रहे हैं। डाइनामाइट न्यूज़ की इस रिपोर्ट में जानिये धर्मात्मा निषाद की अंतिम पोस्ट की अंदर की बातें

लखनऊ: महराजगंज जनपद के पनियरा थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत नरकटहां में निषाद पार्टी के युवा नेता और पूर्व प्रदेश सचिव धर्मात्मा निषाद की आत्महत्या को लेकर चर्चाओं का बाजार गरम है। सियासी गलियारों में भी यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है। घटना के एक दिन बाद पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज की गई लेकिन पीड़ित परिजन एफआईआर को लेकर पुलिस पर सवाल उठा रहे हैं।
धर्मात्मा निषाद ने रविवार को अपने घर में फंदे से झूलकर आत्महत्या की। सुसाइड से पहले धर्मात्मा निषाद ने सोशल मीडिया पर एक लंबी चौड़ी पोस्ट लिखी। फेसबुक पर निषाद पार्टी के नेता ने 1876 शब्दों की अपनी अंतिम पोस्ट लिखी और आत्महत्या के लिये विवश होने के कई कारण बताये।
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पुलिस प्रशासन से लेकर आम जनता और सियासत से जुड़े लोग धर्मात्मा निषाद की फेसबुक पर सुसाइड से पहले लिखे अंतिम पोस्ट के मायने ढ़ूंढ़ रहे हैं। सवाल यह भी है कि उन्होंने सुसाइड जैसा खतरनाक कदम उठाया क्यों उठाया और उनके इस आत्मघाती फैसले की असली वजह क्या रही?
धर्मात्मा निषाद ने अपनी इस अंतिम पोस्ट के अंतिम पैरा में लिखा ‘मैं अगर दुनियां छोड़कर जा रहा हूँ तो इसका सबसे बड़ा कारण डॉ. संजय कुमार निषाद और उनके बेटे प्रवीण कुमार निषाद, ई श्रवण कुमार निषाद और गद्दार दोस्त जय प्रकाश निषाद है। मैं फिर कह रहा हूँ कि अगर मैं मारना चाहता तो इन ***** को कभी भी मार सकता था, मगर मैं हत्यारा नहीं बनना चाहता था”।
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धर्मात्मा निषाद ने अंत में लिखा कि “मेरे सामाजिक और राजनैतिक जीवन में अगर जाने-अनजाने में किसी के साथ मुझसे कोई भूल या गलती हो गई हो तो आप लोग क्षमा करियेगा और मेरे परिवार का ख्याल रखियेगा”।
“मुझे माफ करना माँ, अंजली, भैया, दीदी।“ वाक्य के साथ उनकी1876 शब्दों की अंतिम पोस्ट खत्म होती है। जबकि पोस्ट की शुरूआत “मैं अपनी जिंदगी की लड़ाई हार गया” से होती है। इसके बाद “यह आखिरी संदेश है” लिखकर यह पोस्ट आगे जारी रहती है। जिसमें निषाद नेता ने कई राज खोले और कई आरोप लगाये हैं।