जम्मू-कश्मीर पुलिस की प्रतिबंधित संगठनों पर कार्रवाई, अलगाववादी नेताओं के आवासों पर छापे
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने प्रतिबंधित संगठनों पर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। कार्रवाई क्यों की गई जानने के लिए पढ़िये डाइनामाइट न्यूज़ की पूरी रिपोर्ट

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बुधवार को प्रतिबंधित संगठनों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए हुर्रियत के एक पूर्व अध्यक्ष समेत कई शीर्ष अलगाववादी नेताओं के ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान के एक दिन बाद की गई है जिसमें उन्होंने कहा था कि कश्मीर में अलगाववाद अब अतीत की बात हो गई है क्योंकि हुर्रियत के दो नेताओं ने अलगाववादी गतिविधियों से खुद को अलग कर लिया है।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, पुलिस ने गैरकानूनी गतिविधियां अधिनियम के तहत दर्ज मामलों के सिलसिले में श्रीनगर और सोपोर में कई जगहों पर छापेमारी की। ये मामले जम्मू-कश्मीर मुस्लिम कॉन्फ्रेंस, जम्मू-कश्मीर मुस्लिम लीग और जम्मू-कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी जैसे प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े हैं।
राजबाग आवास की तलाशी
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पुलिस के मुताबिक, इन संगठनों में संलिप्तता के संदेह और पिछले साल दर्ज कई मामलों की जांच को आगे बढ़ाने के लिए यह कार्रवाई की गई है। छापेमारी के दौरान हुर्रियत के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर अब्दुल गनी भट के सोपोर स्थित बोटिंगू आवास और श्रीनगर के वजीर बाग स्थित राजबाग आवास की तलाशी ली गई।
सात अन्य स्थानों पर भी छापेमारी
इसके अलावा जेल में बंद अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह के आवास पर भी छापेमारी की गई। पुलिस ने श्रीनगर में सात अन्य स्थानों पर भी छापेमारी की, जिसमें कथित तौर पर अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों को निशाना बनाया गया। इनमें जेल में बंद मसरत आलम भट और मुश्ताक अहमद भट उर्फ गुग्गा साहब के ठिकाने भी शामिल हैं।
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पुलिस के अनुसार, एनआईए अधिनियम के तहत नामित विशेष न्यायाधीश से तलाशी वारंट प्राप्त करने के बाद सभी छापे मारे गए। यह कार्रवाई पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट और स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में की गई। पुलिस ने एक बयान में कहा, "जांच का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में शेष अलगाववादी और आतंकवादी संरचनाओं को खत्म करना है, ताकि ऐसी गतिविधियों में शामिल लोगों की पहचान की जा सके और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके।"