Lalu Yadav In ED Office: लैंड फॉर जॉब स्कैम में लालू यादव से ED ने पूछे ये अहम सवाल

डीएन ब्यूरो

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने पटना में बुधवार को 4 घंटे तक तक सवाल-जवाब किया। पढ़िए डाइनामाइट न्यूज़ की पूरी रिपोर्ट

लालू यादव से ED का आमना -सामना
लालू यादव से ED का आमना -सामना


पटना: लैंड फॉर जॉब स्कैम केस में लालू यादव बुधवार को सुबह 11 बजे ईडी कार्यालय पहुंचे। ईडी ने उन्हें समन भेजकर 11 बजे ही पटना स्थित दफ्तर बुलाया था। लालू यादव और मीसा भारती ईडी के कार्यालय पहुंचे तो सैकड़ों की तादाद में ईडी ऑफिस के बाहर राजद के कार्यकर्ता और समर्थक जमा थे। लालू यादव जिंदाबाद के नारे ईडी ऑफिस के बाहर लगे।

डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार लैंड फॉर जॉब केस में भ्रष्टाचार का सामना कर रहे लालू प्रसाद पर ईडी ने तीखे सवाल दागे। ईडी की टीम बारी-बारी लालू यादव से जमीन के बदले में नौकरी घोटाला से जुड़े कई सवाल पूछे। इस दौरान लालू यादव ने भी अपने अंदाज में सवालों का जवाब दिया। ईडी ने पूछा-

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ईडी ने पूछा कि किशुन देव राय ने अपनी जमीन 3 हजार वर्ग फीट की जमीन मात्र 3 लाख 75 हज़ार रुपए में राबड़ी देवी को ही क्यों बेचा?
राज कुमार सिंह, मिथिलेश कुमार और अजय कुमार से आप कब मिले थे?

1. आपसे मिलने और राबड़ी देवी को जमीन मिलने के बाद ही इन तीनो को मध्य रेलवे मुंबई में ग्रुप डी के पद पर नौकरी मिली?
2. राबड़ी देवी के नाम जमीन रजिस्ट्री होने के बाद संजय राय और उसके परिवार के दो सदस्य को रेलवे में नौकरी मिली ऐसा क्यों?
3. जमीन रजिस्ट्री के बाद ही किरण देवी के बेटे अभिषेक कुमार को सेंट्रल रेलवे मुंबई में नौकरी मिली ऐसा क्यों?
4. किरण देवी ने अपनी 80 हजार 905 वर्ग फीट जमीन तीन लाख सत्तर हजार में आख़िर आपकी बेटी मीसा भारती को ही क्यों बेची?

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आरोप है कि लालू यादव जब रेलमंत्री थे तक 2004 से 2009 के बीच विभिन्न रेलमंडलों में जमीन लेकर कई लोगों को ग्रुप-डी में नौकरी दी गयी थी। नौकरी लेने वालों से जमीन तत्कालीन रेल मंत्री लालू यादव के परिवार के सदस्यों और एक संबंधित कंपनी के नाम करवायी गयी थी।

आरोप के अनुसार, लालू परिवार ने बिहार मे एक लाख स्वॉयर फीट से ज्यादा जमीन महज 26 लाख रुपए में हासिल कर ली थी, जबकि उस समय के सरकारी दर के अनुसार, जमीन की कीमत करोडों मे थी। इतने कम पैसों मे जमीन लेने के बाद ज्यादातर केस में जमीन मालिक को कैश मे भुगतान किया गया।










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