Lifestyle News: कैल्शियम की कमी से शरीर की हड्डियाँ होती हैं कमजोर, इन 6 संकेतों से करें पहचान
कैल्शियम की कमी से हड्डियाँ कमज़ोर हो जाती हैं। इससे दर्द, मांसपेशियों में ऐंठन, दांतों की समस्या, थकान, नाखून टूटना और मानसिक परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। डाइनामाइट न्यूज़ की रिपोर्ट में पढ़ें हड्डियों को मज़बूत रखने के उपाय।

नई दिल्ली: कैल्शियम हमारे शरीर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण खनिज है, जो हड्डियों और दाँतों को मज़बूती प्रदान करता है। इसके अलावा यह मांसपेशियों के संकुचन, तंत्रिका संचार और रक्त के थक्के जमने जैसी कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में भी भूमिका निभाता है। यदि शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाती है, तो इससे हड्डियों की कमजोरी, मांसपेशियों में ऐंठन और अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
हड्डियों और जोड़ों में दर्द
कैल्शियम की कमी के सबसे सामान्य लक्षणों में से एक है हड्डियों और जोड़ों में दर्द। जब हड्डियों में कैल्शियम की मात्रा कम हो जाती है, तो वे कमजोर हो जाती हैं और आसानी से टूटने का खतरा बढ़ जाता है। यदि आपको हड्डियों में लगातार दर्द या कमजोरी महसूस हो रही है, तो यह संकेत हो सकता है कि आपके शरीर को अधिक कैल्शियम की आवश्यकता है।
मांसपेशियों में ऐंठन और झटके
कैल्शियम मांसपेशियों के सही कार्य के लिए आवश्यक है। यदि आपके शरीर में कैल्शियम की कमी है, तो मांसपेशियों में ऐंठन, झटके या अकड़न की समस्या हो सकती है। यह विशेष रूप से रात के समय या व्यायाम के बाद अधिक महसूस हो सकती है।
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दाँतों की समस्याएँ
कैल्शियम दाँतों को मजबूत बनाने में भी मदद करता है। इसकी कमी से दाँतों में कैविटी, मसूड़ों से खून आना, दाँतों की संवेदनशीलता और दाँतों के गिरने जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। यदि आप इन लक्षणों का सामना कर रहे हैं, तो डॉक्टर से परामर्श करना आवश्यक है।
थकान और कमजोरी
कैल्शियम की कमी से शरीर में ऊर्जा की स्तर में गिरावट आ सकती है, जिससे आपको थकान और कमजोरी का अनुभव होता है। यह थकान सामान्य कार्यों को भी कठिन बना सकती है।
नाखूनों का टूटना और बालों का झड़ना
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कम कैल्शियम स्तर के कारण नाखून कमजोर हो सकते हैं, जिससे वे आसानी से टूटने लगते हैं। साथ ही बालों का झड़ना भी कैल्शियम की कमी का संकेत हो सकता है।
मनोदशा में बदलाव और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
कैल्शियम का प्रभाव न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। इसकी कमी से चिंता, डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
इसे पूरा करने के उपाय
कैल्शियम की आवश्यकता उम्र और जीवनशैली पर निर्भर करती है। बच्चों, युवाओं, गर्भवती महिलाओं और वृद्ध व्यक्तियों को अधिक कैल्शियम की आवश्यकता होती है। आप कैल्शियम को डेयरी उत्पाद (दूध, दही, पनीर), हरी पत्तेदार सब्जियाँ (पालक, मेथी, ब्रोकोली), कैल्शियम-फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ, बादाम, तिल और सोया उत्पाद से कैल्शियम की कमी को पूरा किया जा सकता है।