Manoj Kumar: 19 साल में बने 'भिखारी' तो कभी 11 रुपये में किया ये काम, जानिए मनोज कुमार से जुड़ी दिलचस्प बातें

डीएन ब्यूरो

हिंदी सिनेमा के दिग्गज कलाकार मनोज कुमार का 87 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। मनोज कुमार ने कई बेहतरीन फिल्में दी हैं, ऐसे में उनका फिल्मी करियर काफी दिलचस्प रहा है। पढ़िए डाइनामाइट न्यूज़ की पूरी रिपोर्ट

बॉलीवुड एक्टर मनोज कुमार
बॉलीवुड एक्टर मनोज कुमार


मुंबई: हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता और निर्देशक मनोज कुमार का 87 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन से फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। मनोज कुमार भारतीय सिनेमा में अपनी देशभक्ति पर आधारित फिल्मों के लिए जाने जाते थे और उन्हें 'भारत कुमार' के नाम से भी पहचाना जाता था। आइये ऐसे में जानते हैं उनके बारे में कुछ दिलचस्प बातें...

निभाया 90 वर्षीय भिखारी का किरदार

डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, मनोज कुमार ने फिल्म इंडस्ट्री में अपने करियर की शुरुआत संघर्षों से भरी थी। महज 19 साल की उम्र में उन्हें फिल्म 'फैशन' (1957) में 90 वर्षीय भिखारी का किरदार निभाने का अवसर मिला। यह किरदार इतना प्रभावशाली था कि उनके परिवार और दोस्त भी उन्हें पहचान नहीं पाए। इस फिल्म के निर्देशक लेखराज भाकड़ी और कुलदीप सहगल ने उन्हें यह भूमिका दी थी। जब मनोज कुमार ने इस किरदार के बारे में सवाल किया तो जवाब मिला, "अभी तो तुम्हारा एक जूता भी नहीं घिसा है। यहां लोगों की उम्र निकल जाती है।" इसी क्षण उन्होंने ठान लिया कि हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान बनाकर ही रहेंगे।

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लेखन से मिली पहचान

अपने शुरुआती करियर में मनोज कुमार ने सिर्फ अभिनय ही नहीं, बल्कि स्क्रिप्ट राइटिंग में भी हाथ आजमाया। जब वह हीरो बनने के लिए संघर्ष कर रहे थे, तभी उन्हें फिल्म 'जमीन और आसमान' के लिए एक सीन लिखने का मौका मिला। इस फिल्म के निर्माता रोशन लाल मल्होत्रा उस समय एक सीन को लेकर परेशान थे, क्योंकि अभिनेता अशोक कुमार को वह पसंद नहीं आ रहा था। तब मनोज कुमार ने वह सीन दोबारा लिखा, जिसे अशोक कुमार ने बेहद पसंद किया। इसके लिए उन्हें 11 रुपये मिले थे। इसके बाद फिल्म इंडस्ट्री में उनकी लेखन प्रतिभा को भी सराहा जाने लगा और कई निर्माता उनसे अपनी फिल्मों के सीन लिखवाने लगे।

सिनेमा में योगदान और विरासत

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मनोज कुमार ने अपने करियर में ‘उपकार’, ‘शोर’, ‘पूरब और पश्चिम’, ‘क्रांति’ और ‘रोटी कपड़ा और मकान’ जैसी यादगार फिल्मों में अभिनय और निर्देशन किया। उनकी देशभक्ति फिल्मों ने उन्हें दर्शकों के बीच अमर बना दिया। उनके योगदान को देखते हुए उन्हें 1992 में पद्मश्री और 2015 में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

मनोज कुमार का यूं अचानक जाना हिंदी सिनेमा के लिए अपूरणीय क्षति है। उनका योगदान और उनकी यादगार फिल्में हमेशा सिनेप्रेमियों के दिलों में जीवित रहेंगी।










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