Uttarakhand: कहां है उत्तराखंड के इस गांव की सड़कें? प्रसव पीड़ा से तड़पती रही गर्भवती महिला के साथ क्या हुआ

डीएन संवाददाता

उत्तराखंड के कई गांवों में आज भी ऐसी जगहें हैं जहां सड़कें नहीं है, जिसकी वजह से एक महिला को प्रसव पीड़ा के दौरान काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। पढ़िए डाइनामाइट न्यूज़ की पूरी रिपोर्ट

गर्भवती महिला को डंडी-कंडी से पहुंचाया अस्पताल
गर्भवती महिला को डंडी-कंडी से पहुंचाया अस्पताल


देवाल (चमोली): उत्तराखंड में जहां सरकार प्रदेश के विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं पर्वतीय क्षेत्रों की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। आज भी राज्य के कई गांव ऐसे हैं जहां सड़क जैसी बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं है।

डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, रविवार को देवाल प्रखंड के भिड़ी (वाण) गांव में सड़क न होने के कारण एक गर्भवती महिला को गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचाने में ग्रामीणों को भारी मशक्कत करनी पड़ी। गांव की भारती देवी, पत्नी प्रदीप सिंह, को प्रसव पीड़ा होने पर ग्रामीणों ने डंडी-कंडी के सहारे सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद उन्हें निजी वाहन के जरिए देवाल अस्पताल ले जाया गया, जहां फिलहाल उनका उपचार चल रहा है।

सड़क न होने से बढ़ रही मुश्किलें

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स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता हीरा सिंह गढ़वाली ने बताया कि भिड़ी तोक तक 3 किमी सड़क स्वीकृत है, लेकिन आज तक इसका निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। सड़क न होने के कारण ग्रामीणों को हर छोटी-बड़ी आपात स्थिति में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

हीरा सिंह ने बताया कि वाण गांव नंदा राजजात यात्रा का अंतिम बसागत गांव है। साथ ही यह क्षेत्र वेदनी बुग्याल, मोनाल टॉप और रूपकुंड ट्रैक का बेस कैंप भी है, जहां हर साल हजारों पर्यटक आते हैं। इसके बावजूद गांव में स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव है। वाण गांव में केवल एक एनएम सेंटर और आयुर्वेदिक चिकित्सालय है। किसी भी आपात स्थिति में ग्रामीणों को 45 किमी दूर देवाल अस्पताल जाना पड़ता है।

ग्रामीणों ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की मांग की

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स्थानीय निवासी कृणा सिंह, उदय सिंह, हीरा सिंह, हयात सिंह, सुरेंद्र सिंह, खिलाफ सिंह, आशा कार्यकर्ता लक्ष्मी देवी और खिलपा देवी सहित कई लोगों ने भारती देवी को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाने में मदद की।

ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि वाण गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोला जाए ताकि भविष्य में गर्भवती महिलाओं और अन्य आपातकालीन मरीजों को राहत मिल सके। साथ ही, आगामी नंदा राजजात यात्रा के दौरान यहां आने वाले श्रद्धालुओं को भी उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।










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