Sonbhadra: कॉलेज के निजीकरण पर मचा बवाल, छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप
ओबरा इंटर कॉलेज के निजीकरण पर बवाल मच गया है। कॉलेज को DAV को सौंपे जाने से नाराज ग्रामीणों ने किया जमकर प्रदर्शन। पढ़िए डाइनामाइट न्यूज़ की पूरी रिपोर्ट

सोनभद्र: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिष्ठित ओबरा इंटरमीडिएट कॉलेज का अस्तित्व समाप्त कर दिया गया है। अब इस कॉलेज को निजी हाथों में सौंपते हुए इसका संचालन DAV संस्थान द्वारा किया जाएगा। इससे पहले, कॉलेज का प्रबंधन राज्य विद्युत परिषद के अधीन था। इस फैसले के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है, और वे इसे गरीब व वंचित वर्ग के विद्यार्थियों के साथ अन्याय बता रहे हैं।
ग्रामीणों में नाराजगी, आंदोलन की चेतावनी
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, ओबरा इंटरमीडिएट कॉलेज ने देश और प्रदेश को कई बड़े अधिकारी, डॉक्टर, और इंजीनियर दिए हैं, लेकिन अब इसके मुख्य द्वार से कॉलेज का नाम हटा दिया गया है, जिससे स्थानीय लोग दुखी हैं। निजीकरण के विरोध में विद्यार्थियों ने अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन भी किया, लेकिन उनकी मांगों को अनसुना कर दिया गया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उत्पादन निगम के उच्च अधिकारियों ने महज ₹300 मासिक किराए पर ओबरा, अनपरा और अन्य निगम स्कूलों को निजी हाथों में सौंप दिया। ग्रामीणों और विद्यार्थियों का कहना है कि यह फैसला गरीब, अनुसूचित जाति, जनजाति और आदिवासी विद्यार्थियों के साथ अन्याय है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कॉलेज को जल्द वापस नहीं लिया गया तो बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
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निजीकरण के खिलाफ नारेबाजी
प्रदर्शनकारियों ने "ओबरा इंटर कॉलेज बचाओ, DAV हटाओ", "ओबरा इंटर कॉलेज को सरकारी इंटर कॉलेज बनाया जाए" और "DAV स्कूल गो बैक" जैसे नारे लगाकर विरोध जताया। उनका कहना है कि सरकारी धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के कारण 1,600 विद्यार्थियों का भविष्य अंधकार में डाल दिया गया है।
विधायक और नेताओं का विरोध
ओबरा विधानसभा महासचिव अमरनाथ यादव ने बताया कि यह मामला कई वर्षों से चला आ रहा है। जब कॉलेज निगम के अधीन था, तब गरीब, वनवासी और दलित तबके के विद्यार्थी आसानी से शिक्षा ग्रहण कर पाते थे। उन्होंने कहा, "बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का सपना था – पढ़ेंगे तो बढ़ेंगे, लेकिन सरकार शिक्षा से बच्चों को वंचित करने का कार्य कर रही है।"
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छात्रों ने इस मुद्दे को शिक्षक एमएलसी राम बिहारी यादव के समक्ष भी उठाया था, जिन्होंने इसे सदन में रखने का प्रयास किया। अमरनाथ यादव ने साफ कहा कि जब तक कॉलेज को दोबारा निगम के अधीन नहीं किया जाता, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।
फीस बढ़ने से छात्रों की संख्या घटी
ग्रामीणों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि निजीकरण के बाद कॉलेज की फीस में मनमानी बढ़ोतरी की गई, जिसके चलते विद्यार्थियों की संख्या आधे से भी कम हो गई है। गरीब परिवारों के लिए शिक्षा अब कठिन होती जा रही है।