सुप्रीम कोर्ट ने बुल्डोजर कार्रवाई पर महाराष्ट्र सरकार को दिया नोटिस, चार हफ्ते में जवाब तलब, जानिये पूरा मामला

डीएन ब्यूरो

बुलडोजर से घर ढहाये जाने के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब तलब किया है। पढ़िये डाइनामाइट न्यूज़ की पूरी रिपोर्ट

महाराष्ट्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
महाराष्ट्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस


नई दिल्ली: बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट द्वारा सख्त आदेश के साथ एक विस्तृत गाइडलाइन जारी की गई है लेकिन इसके बावजूद भी सरकारों और विभागों द्वारा इसका पालन नहीं किया जा रहा है। महाराष्ट्र में घर ढहाये जाने के एक मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फिर एक बार सख्त रुख अपनाया है और महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी करके चार हफ्ते में जवाब मांगा है। 

डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जस्टिस बीआर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने सोमवार को महाराष्ट्र अधिकारियों को नोटिस जारी किया और चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा। 

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याचिका में संपत्तियों को गिराने पर सर्वोच्च न्यायालय के नवंबर 2025 के फैसले का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने दिशा निर्देश निर्धारित किए और बिना पूर्व कारण बताओ नोटिस दिए संपत्तियों को ध्वस्त करने पर रोक लगा दी गई थी। इसके साथ ही कोर्ट ने पीड़ित पक्ष को जवाब देने के लिए 15 दिन का समय दिया गया था।

क्या है मामला 
दरअसल, ये ताजा मामला सिंधुदुर्ग जिले का है, जहां क्रिकेट मैच के दौरान कथित तौर पर "भारत विरोधी" नारे लगाने के मामले में एक घर और दो दुकानों को गिराया गया। सुप्रीम कोर्ट ने अब अवमानना कार्यवाही शुरू करने की मांग वाली याचिका पर महाराष्ट्र प्राधिकरण से जवाब मांगा है। 

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याचिकाकर्ता ने कहा कि पिछले महीने चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच के दौरान कथित तौर पर भारत विरोधी नारे लगाने वाले 15 वर्षीय एक किशोर के बारे में एक शिकायत दर्ज की गई थी, जिसके बाद अधिकारियों द्वारा तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई थी। अधिकारियों ने दो कबाड़ की दुकानें, जिनमें से एक किशोर के पिता की थी और दूसरी उसके चाचा की थी, को अधिकारियों ने मालिकों को कोई नोटिस दिए बिना ही ध्वस्त कर दिया था।

इसी मामले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई और अब शीर्ष अदालत ने सरकार को नोटिस जारी किया।










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