भारत में किसी भी लोकतांत्रिक मूल्य में कोई कटौती नहीं हुई है, बोले जगदीप धनखड़

डीएन ब्यूरो

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा है कि भारत में किसी भी लोकतांत्रिक मूल्य में कोई कटौती नहीं हुई है और यह पहले की अपेक्षा कहीं अधिक फल-फूल रहा है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट डाइनामाइट न्यूज़ पर

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़


लंदन: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा है कि भारत में किसी भी लोकतांत्रिक मूल्य में कोई कटौती नहीं हुई है और यह पहले की अपेक्षा कहीं अधिक फल-फूल रहा है।

उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में रह रहे भारतीय छात्रों की यह जिम्मेदारी है कि वे अपने देश के बारे में गलत विमर्श का विरोध करें।

उपराष्ट्रपति ने यहां  वेस्टमिंस्टर एबे में ब्रिटेन के महाराजा चार्ल्स तृतीय के ऐतिहासिक राज्याभिषेक समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व किया था।

डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार धनखड़ ने नयी दिल्ली के लिए रवाना होने से पहले भारतीय उच्चायोग द्वारा शनिवार शाम आयोजित एक कार्यक्रम में भारत के छात्रों से बातचीत की।

यह भी पढ़ें | महाराजा चार्ल्स तृतीय के ऐतिहासिक राज्याभिषेक समारोह में जानिये भारत के प्रतिनिधित्व के बारे में

उपराष्ट्रपति ने कार्यक्रम में मौजूद छात्रों से कहा कि भारत को उनकी उपलब्धियों और प्रतिभा पर गर्व है तथा उनसे देश के सद्भावना दूत की भूमिका निभाने का आग्रह किया।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की उपलब्धियों का जिक्र किया और इसकी मजबूत लोकतांत्रिक पहचान पर जोर दिया।

उपराष्ट्रपति ने कहा,‘‘ भारत वैश्विक मामलों में अपनी समझ,अपने कल्याण तथा वैश्विक शांति के हिसाब से अपना रुख निर्धारित करता है। भारत महाशक्ति के रूप में उभर रहा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ भारत के अलावा दुनिया के किसी भी हिस्से में अभिव्यक्ति की इतनी स्वतंत्रता नहीं है। हमारे देश में किसी भी लोकतांत्रिक मूल्य में कटौती नहीं हुई है, बल्कि यह पहले की अपेक्षा कहीं अधिक फल -फूल रहा है।’’

यह भी पढ़ें | Vice President Election 2022: जानिये, उपराष्ट्रपति चुनाव में वाईएसआर कांग्रेस किसका करेगी समर्थन

उपराष्ट्रपति ने कहा कि ब्रिटेन में रह रहे भारतीय छात्रों की यह जिम्मेदारी है कि वे देश के बारे में गलत विमर्श का विरोध करें।

धनखड़ ने कहा,‘‘अगर आप इससे सहमत नहीं हैं, तो आपको इसका विरोध करना चाहिए। इस तरह के जीवंत लोकतंत्र के लिए गलत विमर्श हमारे राष्ट्रीय हित के खिलाफ है। मुझे इसमें जरा भी संदेह नहीं है कि सर्वाधिक मजबूत प्रतिक्रिया तार्किक सोच-विचार से आती है।’’










संबंधित समाचार