Tata Group: टाटा समूह के लिये क्यों मनहूस साबित हुआ ये साल?

डीएन ब्यूरो

साल 2024 खत्म होने में बस अब कुछ ही दिन बाकी हैं। ये साल तो बीत गया लेकिन इस साल जो हुआ वो कोई नहीं भूल पाएगा। एक मायने में ये साल देश के लिए मनहूस साबित हुआ है। डाइनामाइट न्यूज़ पर पढ़िए पूरी खबर

टाटा समूह के लिए मनहूस रहा साल
टाटा समूह के लिए मनहूस रहा साल


नई दिल्ली: टाटा ग्रुप, भारत के सबसे बड़े और सबसे पुराने औद्योगिक समूहों में से एक है। नमक से लेकर हवाई जहाज तक, टाटा लगभग हर जरूरत को पूरा करने की ताकत रखता है। टाटा ग्रुप की कंपनियों का राजस्व 2023-24 में करीब 165 अरब डॉलर था। वहीं टाटा ग्रुप की कंपनियों की कुल मार्केट वैल्यू 365 अरब डॉलर है। साथ ही टाटा ग्रुप की कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या भी 10 लाख से ज़्यादा है। इतना सब कुछ होने के बाद भी टाटा ग्रुप के लिए साल 2024 मनहूस साबित हुआ है। 

दुखद है ये साल 2024

डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, इस साल की जो सबसे दुखद बात है वो सिर्फ टाटा समूह के लिए नहीं बल्कि पूरे देश के लिए है, क्योंकि इस साल दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा हमें छोड़कर चले गए। रतन टाटा सिर्फ उद्योगपति नहीं थे बल्कि वह एक परोपकारी और समाज के लिए कल्याण करने वाले इंसान थे, जिनकी वजह से लाखों लोगों का जीवन प्रभावित हुआ है। शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य सेवा तक, उनकी पहल ने एक गहरी छाप छोड़ी है, जिससे आने वाली कई पीढ़ियों को लाभ मिलेगा।

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इतने बड़ा कारोबार फिर भी अमीरों की लिस्ट में नहीं

रतन टाटा इतने बड़े बिज़नेसमैन थे, लेकिन उनके निधन के बाद जब भी उन्हें याद किया जाएगा तो उनकी संपत्ति या फिर इतने बड़े कारोबार से ज्यादा उनके व्यवहार, उनकी सागदी और उनके समर्पण के लिए याद किया जाएगा। टाटा समूह का कुल बाजार मूल्य 28 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा का है, जो बाकी कई कंपनियों से कहीं ज्यादा है, लेकिन फिर भी उनका नाम कभी फोर्ब्स या हारून की सबसे अमीर लिस्ट में शामिल नहीं हुआ, क्योंकि रतन टाटा ग्रुप अपनी कमाई का 60 से 65 प्रतिशत हिस्सा दान में दे देता है। इस फिलॉसिपी को इस ग्रुप के फाउंडर जमशेदजी नसरवानजी फॉलो करते थे, वह कहते थे कि हम जितना समाज से कमाते हैं उतना हमें उन्हें वापस भी करना चाहिए, बस इसलिए कभी टाटा अमीरों की लिस्ट में शामिल नहीं हुए। 

दूसरों की मदद के लिए हमेशा तत्पर 

रतन टाटा हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तत्पर रहते थे। फिर चाहे बात देश की हो या उनकी कंपनी में काम करने वाले किसी कर्मचारी की हो। आतंकियों ने देश पर हमला किया हो या कोरोना माहामारी से देश जूझ रहा हो, हर कदम पर रतन टाटा देश की मदद करने के लिए आगे आए हैं। 

ये कहना गलत नहीं होगा कि एक सफल बिजनेसमैन के रूप में पूरी दुनिया उन्हें याद रखेगी, लेकिन बतौर इंसान उनके सेवा भाव ने उन्हें अमर बना दिया है। 
 










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