Uttarakhand Land law: उत्तराखंड में बाहरियों को जमीन खरीदने पर पाबंदी, बना ये कानून

डीएन ब्यूरो

उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होने के बाद अब एक और भूमि से जुड़ा एक बड़ा फैसला हुआ। पढ़िए डाइनामाइट न्यूज़ की पूरी रिपोर्ट

उत्तराखंड भू कानून में बदलाव
उत्तराखंड भू कानून में बदलाव


देहरादून: उत्तराखंड की धामी सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने के बाद एक दूसरा नया कानून बनाया है। जिसमें राज्य से बाहर के लोग खेती की जमीन को नहीं खरीद सकते हैं। 

डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार उत्तराखंड में लगातार उठती मांग के बीच पुष्कर सिंह धामी सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए सख्त भू-कानून को मंजूरी दे दी। संशोधित ड्राफ्ट को मौजूदा विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा, जिसके बाद राज्य के बाहरी लोग देवभूमि में खेती और हॉर्टिकल्चर के लिए जमीन नहीं खरीद सकेंगे।

बीते दशकभर में इस राज्य में खेती-किसानी की जमीनें तेजी से अलग इस्तेमाल में आने लगी थीं, जिसके बाद इस तरह के कानून की मांग उठने लगी।

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दरअसल आजादी के बाद से उत्तरप्रदेश से बंटकर अलग राज्य बनने तक उत्तराखंड में जमीन खरीदने पर कोई रोकटोक नहीं थी। यहां तक कि स्टेट बनने के बाद भी इसपर खास एतराज नहीं लिया गया। नतीजा ये हुआ कि बाहरी लोग यहां आने और सस्ती जमीनें खरीदकर अपने मुताबिक इस्तेमाल करने लगे। धीरे-धीरे पहाड़ों के लोग परेशान होने लगे। चूंकि यहां टूरिज्म बहुत ज्यादा है, लिहाजा बाहरी लोग फार्म हाउस, होटल और रिजॉर्ट्स बनाने लगे। हालात ये हुए कि स्थानीय लोगों को खेती के लिए जमीन कम पड़ने लगी।

जानकारी के अनुसार पहाड़ी इलाका होने की वजह से यहां खेती-किसानी उतनी आसान नहीं। कुछ ही इलाके हैं, जहां फसलें लगाई जा सकती हैं, वो भी सीढ़ीदार टेक्नीक के जरिए। ऐसे में उपजाऊ जमीनों पर होटलों के बनने से राज्य के पास फसलों की कमी पड़ने लगी। स्टेट बनने के दौरान यहां लगभग 7.70 लाख हेक्टेयर जमीन खेती लायक थी।

वहीं दो दशकों में ये कम होते-होते 5.68 लाख हेक्टेयर रह गई। कई धांधलियां भी हुई। जैसे टिहरी में किसानों को मिली जमीन पर लैंड माफिया ने अवैध रूप से होटल और रिजॉर्ट्स बना लिए। जंगलों में भी ये गोरखधंधा चलने लगा।

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बताते चलें कि देवभूमि अकेली जगह नहीं, जहां खेती और हॉर्टिकल्चर पर सख्त कानून बन रहे हैं। ज्यादातर पहाड़ी राज्यों में ये नियम पहले से है। जैसे पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश को ही लें तो वहां राज्य के स्थाई निवासी ही खेती की जमीन खरीद सकते हैं। बाहरियों को इसके लिए स्पेशल पर्मिशन लेनी होती है, जो काफी मुश्किल है।

इसी तरह से सिक्किम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश भी हैं, जहां फार्मिंग के लिए ही नहीं, ऐसे भी बाहरी राज्य जमीन नहीं ले सकते। ये इसलिए है ताकि वहां के मूल निवासियों का हक सुरक्षित रह सकें और रिसोर्सेज पर कब्जा न हो।










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