Manipur Crisis Explainer: दो साल से जल रहा है राज्य, देखिए हिंसा की आग में क्यों झुलस रहा है मणिपुर?

डीएन ब्यूरो

मणिपुर बीते दो साल से जातीय हिंसा की आग में जल रहा है। यहां कुकी और मैतेई समुदाय के बीच टकराव का ये नया अध्याय कैसे शुरू हुआ डाइनामाइट न्यूज़ की रिपोर्ट में जानिए।



मणिपुर: मणिपुर एक बार फिर हिंसा की आग में झुलस रहा है। शनिवार, 8 मार्च को मणिपुर में उस वक्त हालात बिगड़ गए, जब केंद्र सरकार के ‘फ्री मूवमेंट’ फैसले के विरोध में कुकी समुदाय के लोगों ने जमकर बवाल किया। इस हिंसा में 27 सुरक्षाकर्मी घायल हो गए, जिनमें दो की हालत गंभीर है। आखिर ये हिंसा क्यों भड़की? इसका मणिपुर के जातीय संघर्ष से क्या संबंध है? आइए जानते हैं पूरी कहानी.

डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार मणिपुर, एक ऐसा राज्य जो बीते दो साल से जातीय हिंसा की आग में जल रहा है। 8 मार्च को मणिपुर में एक बार फिर बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क उठी। केंद्र सरकार के 'फ्री मूवमेंट' यानी बिना किसी रोक-टोक के एक जिले से दूसरे जिले में आने-जाने के फैसले के पहले ही दिन हिंसा भड़क गई। 

एक प्रदर्शनकारी की गई जान 

इस हिंसा में 27 सुरक्षाकर्मी घायल हो गए, जिनमें से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। साथ ही एक प्रदर्शनकारी की जान भी चली गई और 40 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इस हिंसा का केंद्र बिंदु था मणिपुर का कांगपोकपी जिला, जहां कुकी प्रदर्शनकारियों ने बसों पर हमला कर दिया।

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प्रदर्शनकारियों ने इंफाल से सेनापति जिले की ओर जा रही एक बस पर हमला किया और देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया। सुरक्षाबलों ने हालात संभालने की पूरी कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारियों का गुस्सा इतना भड़क उठा कि गमगीफई, मोटबंग और कीथेलमैनबी इलाकों में हिंसा तेज हो गई। अब कुकी समुदाय ने सुरक्षाबलों की कार्रवाई के खिलाफ अनिश्चितकालीन बंद बुलाया है। 

क्यों भड़की हिंसा?

अब सवाल ये है कि आखिर ये हिंसा क्यों भड़की? मणिपुर में कुकी और मैतेई समुदाय के बीच टकराव का ये नया अध्याय कैसे शुरू हुआ? दरअसल, मणिपुर में कुकी और मैतेई समुदाय के बीच सालों से तनाव बना हुआ है। कुकी समुदाय मुख्य रूप से पहाड़ी इलाकों में रहता है, जबकि मैतेई समुदाय मैदानी क्षेत्रों में। कुकी जनजाति मणिपुर और मिजोरम राज्य के दक्षिण पूर्वी भाग में रहती है। अरुणाचल प्रदेश को छोड़कर कुकी समुदाय के लोग उत्तर पूर्व भारत के करीब सभी राज्यों में मौजूद हैं।

 मणिपुर की कुल आबादी में नागा और कुकी की जनसंख्या लगभग 40 प्रतिशत है लेकिन मणिपुर की 90 प्रतिशत भूमि पर ये रहते हैं। वहीं मैतई का राजधानी इंफाल में प्रभुत्व है और इन्हें आमतौर पर मणिपुरी कहा जाता है। 2011 की जनगणना के अनुसार मैतेई राज्य की आबादी का करीब 64 प्रतिशत हैं लेकिन फिर भी मणिपुर की भूमि के लगभग 10 प्रतिशत हिस्से पर ही उनका कब्जा है। दोनों समुदायों के बीच बीते दो सालों में इस संघर्ष ने 250 से ज्यादा लोगों की जान ले ली है और हजारों लोग बेघर हो चुके हैं।

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अनुसूचित जनजाति के दर्जे के पीछे हुआ बवाल?

कुकी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा मिला हुआ है, जबकि मैतेई समुदाय लंबे समय से यही दर्जा पाने की मांग कर रहा है। वहीं कुकी समुदाय का मानना है कि अगर मैतेई को एसटी का दर्जा मिल गया, तो वो जरूरत से ज्यादा नौकरियां और लाभ हासिल कर लेंगे इसी को लेकर दोनों समुदायों के बीच खाई गहरी हो गई है।

2023 में मणिपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया था। इसी के बाद हालात और बिगड़ गए।  

अब सवाल ये है कि आखिर मणिपुर में शांति कब लौटेगी? क्या कुकी और मैतेई समुदाय के बीच ये संघर्ष कभी खत्म होगा? 










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