PMGSY: हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण संपर्क के लिये बनी ये खास योजना, जानिये कितनी घनराशि मिली

डीएन ब्यूरो

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तीसरे चरण के तहत कई पुलों के निर्माण से हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण संपर्क में सुधार होगा। पढ़िए डाइनामाइट न्यूज़ की खास रिपोर्ट

प्रतीकात्मक फोटो
प्रतीकात्मक फोटो


शिमला: प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तीसरे चरण के तहत हिमाचल प्रदेश में 21 पुलों के निर्माण की योजना बनाई गई है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इस परियोजना के लिए कुल 140.90 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। इसमें से 126.81 करोड़ रुपये की राशि ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा और 14.09 करोड़ रुपये प्रदेश सरकार द्वारा वहन की जाएगी। इन पुलों के निर्माण से हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों में ग्रामीण क्षेत्रों के संपर्क मार्ग को सुदृढ़ किया जाएगा। 

पुलों की लंबाई और निर्माण की योजना

इन पुलों की कुल लंबाई 970.772 मीटर होगी। जो कि विभिन्न जिलों में स्थित खड्डों, नदियों और अन्य जलस्रोतों पर बनेंगे। हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं के कारण कई पुलों का ध्वस्त होना चिंता का विषय था लेकिन अब इस परियोजना के जरिए इन पुलों को फिर से तैयार किया जाएगा। 

पुलों का निर्माण कहां-कहां होगा  

हमीरपुर जिला के बसी से सरकाघाट मार्ग पर चैंथ खड्ड, सीर खड्ड, और लिंडी खड्ड पर पुलों का निर्माण किया जाएगा। बक्कर खड्ड, जमली खड्ड और घुडविन खड्ड पर भी पुल बनेंगे। इसके अलावा अन्य महत्वपूर्ण पुलों का उन्नयन भी होगा। जिसमें लाल घर नाला, मंजही खड्ड, देही खड्ड, धलियारा खड्ड, मनेड खड्ड और कहुली खड्ड।

कांगड़ा जिला  

मौल खड्ड पर 40 मीटर लंबा पीएससी बॉक्स गर्डर पुल बनाया जाएगा।

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कुल्लू जिला 

संज खड्ड पर दो स्टील ट्रस पुलों का उन्नयन किया जाएगा।

लाहौल-स्पीति जिला 

चौखांग नाला, चेनाब नदी, किशोरी नाला, तैलिंग नाला और मूरिंग नाला पर पुलों को अपग्रेड किया जाएगा।

मंडी जिला  

पंडोह में ब्यास नदी पर 110 मीटर लंबे डबल-लेन पुल का निर्माण किया जाएगा।

निर्माण में उच्च गुणवत्ता मानकों का पालन 

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राज्य सरकार ने पुलों के निर्माण से पहले कई अहम परीक्षणों का निर्णय लिया है, जिसमें जलग्रहण क्षेत्र की गणना, हाइड्रोलिक डेटा, भू-तकनीकी जांच और संरचनात्मक डिजाइनों का सत्यापन शामिल है। परियोजना की निगरानी के लिए एक पुल प्रबंधन प्रकोष्ठ का गठन किया जाएगा। जो पुलों की गुणवत्ता और निर्माण कार्य की निगरानी करेगा। 

मानकों का पालन और परीक्षण  

इन पुलों की गुणवत्ता जांच के लिए विभिन्न मानकों का पालन किया जाएगा, जिनमें पाइल इंटेग्रिटी टेस्ट और आईआरसी (इंडियन रोड कांग्रेस) मानकों के अनुसार स्वीकृति भार परीक्षण शामिल है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पुल निर्माण कार्य में उच्चतम गुणवत्ता मानकों का पालन हो, ताकि इन पुलों की संरचना मजबूत और टिकाऊ हो। 

ग्रामीण समुदायों के लिए लाभ 

इन पुलों के निर्माण से हिमाचल प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों को सभी मौसमों में सड़क संपर्क मिलेगा, जिससे ग्रामीण समुदायों की आवाजाही सुगम होगी। इससे न केवल स्थानीय लोगों की जीवनशैली में सुधार होगा, बल्कि उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और अन्य सुविधाओं तक बेहतर पहुंच मिलेगी। 

मंत्री का बयान  

लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बताया कि इन परियोजनाओं को मंजूरी देने के लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की गई थी। उन्होंने कहा कि यह मंजूरी कुछ विशिष्ट शर्तों के साथ दी गई है, ताकि निर्माण कार्य में उच्चतम गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। 










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