जस्टिस यशवंत वर्मा के आवास से नकदी मिलने की इनसाइड स्टोरी, कब मिलेंगे इन सवालों को जवाब?
राजनीतिक गलियारों से लेकर पॉवर कोरिडोर और कानूनी हलकों में जस्टिस यशवंत वर्मा और उनसे जुड़े मामले की चर्चा जोरों पर है। आखिर क्या है ये पूरा मामला? पढ़िये डाइनामाइट न्यूज़ की पूरी रिपोर्ट

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा की चर्चा जोरों पर है। जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित सरकार बंगले से 14 मार्च को कथित तौर भारी मात्रा में नकदी बरामद होने से कई सवाल खड़े हो गये हैं। सवाल ये कि आखिर जस्टिस वर्मा के आवास पर ये नकदी आई कैसे, ये नकदी किसने और क्यों दी? आखिर कितनी नकदी बरामद हुई? इस समय ये नकदी किसके पास है? क्या ये कोई बड़े भ्रष्टाचार का मामला है या उनके खिलाफ कोई साजिश? इस मामले पर क्या है जस्टिस वर्मा और लॉ ऑफ लैंड से जुड़े लोगों की प्रतिक्रिया।
हम आपको इस मामले के सभी सभी पहलुओं पर बात करेंगे और ये भी बताएंगे कि आखिर ये पूरा मामला है क्या? इसके साथ ही हम आपको बताएंगी कि नकदी मिलने के मामले में क्या हैं कार्रवाई के प्रावधान?
कौन हैं जस्टिस यशवंत वर्मा?
जस्टिस यशवंत वर्मा मूल रूप से इलाहाबाद यानि प्रयागराज के रहने वाले हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से बीकॉम (ऑनर्स) किया और फिर मध्य प्रदेश के रीवा विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने पूरी करने के बाद 1992 में एक अधिवक्ता के रूप में अपना कानूनी सफर शुरू किया।
वे 2012 से 13 तक उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख स्थाई अधिवक्ता भी रहेय़ वे 13 अक्टूबर 2014 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के एडिशनल जज बनाये गये और 1 फरवरी 2016 को स्थायी जज के रूप में उनको शपथ दिलाई गई थी। जस्टिस वर्मा को 11 अक्टूबर, 2021 को दिल्ली हाई कोर्ट में नियुक्ति मिली। 56 वर्षीय जस्टिस वर्मा दिल्ली हाई कोर्ट में वर्तमान में बिक्री कर, जीएसटी, कंपनी अपील जैसे महत्वपूर्ण केसों की सुनवाई करने वाली बेंच की अध्यक्षता कर रहे हैं. वह अदालत के दूसरे सबसे वरिष्ठ जज हैं।
आखिर दिल्ली में क्या कुछ हुआ
यह भी पढ़ें |
New Zealand PM to Visit India: न्यूजीलैंड के पीएम क्रिस्टोफर लक्सन का चार दिवसीय भारत दौरा, जानें क्या होगा पूरा कार्यक्रम?
जस्टिस वर्मा के साथ। जानकारी के मुताबिक होली के अगले दिन '14 मार्च की रात फायर कंट्रोल रूम को जस्टिस वर्मा के तुगलक क्रिसेंट रोड स्थित आवास पर आग लगने की सूचना मिली थी।
सूचना पर दमकल की दो गाड़ियों को मौके पर भेजा गया। आग स्टेशनरी और घरेलू सामान से भरे एक स्टोर रूम में लगी थी। बताया जाता है कि इसी दौरान दमकल की टीम को जस्टिस वर्मा के आवास से भारी मात्रा में नकदी बरामद की गई, जिससे ये मामला गंभीर हो गया। हालांकि इस पूरी घटना के दौरान जस्टिस यशवंत वर्मा तब घर में नहीं थे और वे किसी काम से दिल्ली से बाहर गए थे।
कोई नकदी नहीं मिली
हालांकि जस्टिस वर्मा के आवास से नकदी मिलने के दावों को दिल्ली अग्निशमन सेवा प्रमुख अतुल गर्ग ने एक सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने साफ किया कि आग बुझाते वक्त फायर ब्रिगेड की उनकी टीम को कोई नकदी नहीं मिली थी। उन्होंने ये भी कहा कि आग बुझाने के तुरंत बाद हमने पुलिस को आग की घटना की सूचना दी। इसके बाद दमकलकर्मियों की टीम मौके से चली गई। दमकलकर्मियों को आग बुझाने के दौरान कोई नकदी नहीं मिली।
नकदी किसने बरामद की?
अतुल गर्ग के इस बयान ने इस मामले को और भी दिलचस्प और संदिग्ध बना दिया है। उनका दावा यदि सच है तो अब सवाल उठा है कि नकीद किसे मिली? आशंका जतायी जा रही है कि हो सकता है कि दिल्ली पुलिस को टीम को ये नकदी मिली हो। दिल्ली पुलिस ने अंदर ही अंदर सरकार या सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को नकदी मिलने की बात बतायी हो। हालांकि नकदी किसने बरामद की ये अभी तक साफ नहीं है।
यह भी पढ़ें |
बीजेपी नेता प्रेम शुक्ला बोले- मोदी सरकार की योजनाओं से जनता को मिला अभूतपूर्व लाभ
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की जांच
इस मामले ने तब और ज्यादा तूल पकड़ा, जब कल शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ नकदी मिलने के मामले की प्रारंभिक जांच शुरू की। डाइनामाइट न्यूज ने भी इस खबर के सबसे पहले प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया। इस प्रारंभिक जांच के दौरान कॉलेजियम ने जस्टिस वर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने का भी प्रस्ताव रखा। आवास से नकदी मिलने के आरोपों के बाद जस्टिस वर्मा शुक्रवार को अपनी नियमित ड्यूटी पर हाई कोर्ट नहीं पहुंचे और न ही इन आरोपों पर उनका कोई बयान आया है। उन्होंने पूरी तरह चुप्पी साध रखी है।
कॉलेजियम द्वारा जस्टिस वर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने के प्रस्ताव पर अधिवक्ता भड़क गये हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के बार एसोसिएशन ने उनके ट्रांसफर पर कड़ा एतराज जताया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्रांसफर किए जाने के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल तिवारी ने कहा, ‘इलाहाबाद हाई कोर्ट कोई कूड़ाघर अथवा भ्रष्टाचार का अड्डा नहीं है, जहां पर किसी भी भ्रष्टाचार में आरोपी न्यायमूर्ति को स्थानांतरित कर दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम का यह निर्णय इलाहाबाद हाई कोर्ट को तोड़ने की मंशा को प्रदर्शित करता है, लेकिन बार एसोसिएशन ऐसा कदापि होने नहीं देगा. उसका कर्तव्य आम जनता का न्यायपालिका पर विश्वास बनाए रखना है।
सीजेआई जांच रिपोर्ट पर करेंगे कार्रवाई
अब जो ताजा जानकारी है उसके मुताबिक जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी बंगले से कथित तौर पर नकदी मिलने के मामले की जांच कर रहे दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने अपनी रिपोर्ट भारत के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना को सौंप दी है। सीजेआई इस जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई करेंगे।
दिल्ली हाई कोर्ट में बिक्री कर, जीएसटी, कंपनी अपील जैसे महत्वपूर्ण केसों की सुनवाई करने वाले जस्टिस वर्मा से जुड़े इस मामले में आगे क्या होता है, ये देखने वाली बात होगी।