Delhi Police ने Bareilly में ऐसा किया Heroin Factory का भंडाफोड़, करोड़ों का माल बरामद
दिल्ली पुलिस ने बरेली में हेरोइन बनाने की फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है। पढ़िए डाइनामाइट न्यूज़ की पूरी रिपोर्ट

नई दिल्ली: दिल्ली की नारकोटिक्स टीम ने बरेली के मीरगंज में छापा मारकर हेरोइन बनाने की एक फैक्टरी का खुलासा किया है। पुलिस ने मौके से चार तस्कर और सप्लायर को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने फैक्टरी से 508 ग्राम हेरोइन, 4.980 किलोग्राम सोडियम, 5.292 किलोग्राम एसिटिक एनहाइड्राइड और अन्य सामान बरामद किए हैं। फैक्टरी मालिक फरार है।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार बरामद हेरोइन की कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।
जिला पुलिस उपायुक्त निधिन वालसन ने बताया कि कर्दमपुरी निवासी नदीम खान की निशानदेही पर पुलिस ने फैक्टरी का खुलासा किया। नदीम के खिलाफ स्पेशल सेल में भी मामला दर्ज है।

निधिन वालसन ने बताया कि नारकोटिक्स टास्क फोर्स पिछले साल दो अप्रैल को जेजे कालोनी निवासी राजेंद्र उर्फ यूसुफ को हेरोइन तस्करी करने के आरोप में गिरफ्तार किया।
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इसके कब्जे से पुलिस ने 520 ग्राम हेरोइन बरामद की। साथ ही पुलिस ने उसके घर से 5 लाख रुपये नकद जब्त किए।

पूछताछ में उसने बताया कि उसने हेरोइन की खेप को गांव भसुन्द्रा बदायूं यूपी निवासी भूरे से खरीदी थी। पुलिस ने 4 अप्रैल को भूरे को गिरफ्तार कर लिया। जिसके पास से 100 ग्राम हेरोइन बरामद हुई।
भूरे ने बताया कि वह हेरोइन की खेप जेजे कालोनी बवाना निवासी नवाब सलाम से खरीदी थी। 5 अप्रैल को पुलिस ने उसके निशानदेही पर नवाब को गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से 108 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। जिसने पूछताछ में बताया कि उसने खेप को नदीम खान से खरीदी थी।
पुलिस ने नदीम की तलाश शुरू की। करीब आठ नौ माह के बाद पुलिस ने तीन मार्च को नदीम को गिरफ्तार कर लिया।
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नदीम ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि हेरोइन बरेली के मीरगंज स्थित फैक्टरी में तैयार की जाती है। पुलिस टीम ने नदीम खान की निशानदेही पर बृहस्पतिवार को बरेली के मीरगंज स्थित इमारत में छापा मारा। जहां से हेरोइन के अलावा इसे बनाने में इस्तेमाल कच्चा माल, केमिकल वगैरह बरामद किए।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि जिस इमारत में फैक्टरी चल रही थी, यह दो सौ गज में स्थित है। इसमें बेसमेंट के अलावा तीन मंजिल है। आरोपी बेसमेंट में करीब चार से पांच घंटे में हेरोइन तैयार करते थे।
आरोपी कच्चे माल में एसिटिक एनहाइड्राइड मिलाते थे। उसके बाद उसमें सोडियम डालकर करीब चार से पांच घंटे मिलाने के बाद उससे बेहतरीन क्वालिटी का हेरोइन तैयार करते थे। जिसको तस्करों के जरिए बाजार में बेचा जाता था।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस से बचने के लिए सप्लायरों का एक कड़ी होता था। जिससे पुलिस को फैक्टरी में पहुंचने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।