गोरखपुर के प्रमुख डाक्टर अनुज सरकारी की बढ़ी मुसीबत, दर्ज होगी FIR

डीएन ब्यूरो

पिछले साल अक्टूबर महीने में शहर के छात्रसंघ चौराहे पर एक हास्पीटल में हुए डाक्टर-सिपाही विवाद के मामले में नया मोड़ आ गया है। पढ़ें पूरी खबर डाइनामाइट न्यूज़ पर

डाक्टर अनुज सरकारी
डाक्टर अनुज सरकारी


गोरखपुर: शहर के छात्रसंघ चौराहे पर बीते साल 4 अक्टूबर को शहर के गैस्ट्रो लीवर रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुज सरकारी का विवाद एक सिपाही के साथ हो गया था। 

इस मामले में अब एक नया मोड़ आ गया है। जिला अदालत ने कैंट पुलिस को गैस्ट्रो लीवर रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुज सरकारी और उनके कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया है। पीड़ित खलीलाबाद के मंझरिया गंगा निवासी सिपाही पंकज कुमार की पत्नी ने कोर्ट से मुकदमा दर्ज कराने की गुहार लगाई थी। 

महिला का आरोप है कि उसके पति और उसे पीटा गया, जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया। उसकी पिटाई कर डॉक्टर के क्लीनिक के अंदर निर्वस्त्र कर दिया गया पर पुलिस ने केस नहीं दर्ज किया।

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कोर्ट में दिए प्रार्थनापत्र में आरोप लगाया कि वह अनुसूचित जाति की महिला है, पेट में दर्द था, तो 2 अक्तूबर 2024 को अपने पति पंकज कुमार के साथ छात्र संघ चौराहा के पास डॉ. अनुज सरकारी के गैस्ट्रो लीवर हास्पिटल पर दिखाने गई थी। डॉक्टर के कहने पर तीन अक्तूबर को हास्पिटल पर ही अल्ट्रासाउण्ड कराया। रिपोर्ट दिखाने पर डॉ. अनुज सरकारी ने सामान्य बताया। बताया कि मुलाकात के दौरान पति पंकज कुमार ने डॉक्टर से अल्ट्रासाउण्ड के लिए ज्यादा शुल्क लिए जाने की बात कही तो डॉ. अनुज सरकारी आगबबूला हो गए और जतिसूचक गाली दी। विरोध किया तो मुझे और पति को खुद और अपने स्टॉफ के लोगों के साथ मारते-पीटते हुए अपनी केबिन में खींचने लगे। इस दौरान पति को बुरी तरह से मार-पीटकर लहूलुहान कर दिया। वहीं, पति के सिर पर लोहे की राड से हमले के बाद डॉक्टर ने ही फोन करके पुलिस बुलवाई। पुलिस दंपति को कैण्ट थाने ले गई। बाद में पूरी घटना की जानकारी के बाद थाने से दम्पति को छोड़ दिया। महिला का आरोप है कि पति पंकज कुमार अपना आधार कार्ड और दवा के कागजात आदि लेने 4 अक्तूबर को वापस डॉक्टर के यहां गए तो डॉक्टर अनुज सरकारी और उनके कर्मचारियों ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए पति को मार-पीटकर धराशायी कर दिया।

कोर्ट ने प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए थानाध्यक्ष कैण्ट को आदेशित किया है कि प्रार्थना पत्र के आधार पर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर नियमानुसार विवेचना किया जाए। 

उधर डाक्टर सरकारी के पक्ष ने तब पुलिस को अपने साथ हुई ज्यादती व मारपीट की बात को बतायी थी कि कैसे सिपाही ने एक दिन बाद क्लिनिक में जबरन घुसकर उनके सिर पर हथौड़ों से मारकर उन्हें लहुलुहान कर दिया था।

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