Waqf Bill: वक्फ बिल पर Akhilesh Yadav और Amit Shah आये आमने-सामने, देखिये क्या हुआ संसद में
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बुधवार को सदन में वक्फ बिल पर भाजपा को आड़े हाथ लिया। पढ़िए डाइनामाइट न्यूज़ की पूरी रिपोर्ट
नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने संसद में वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान बीजेपी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार मुसलमानों की बात नहीं सुन रही है, जबकि हमारा देश तो मिलीजुली संस्कृति से बना है।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि चीन के कब्जे वाली जमीन ज्यादा बड़ा मुद्दा है न कि वक्फ बिल। चीन ने जिस जमीन पर गांव बसाए वो बड़ा मुद्दा है। रेलवे की जमीनों को बेचा जा रहा है। रेलवे हो या डिफेंस सारी जमीनें भारत की हैं।
उन्होंने निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा जब भी कोई नया बिल लाती है, तब अपनी नाकामी छिपाती है।
सपा चीफ ने कहा कि महाकुंभ में कितने हिंदू मारे गए, इस पर पर्दा डालने के लिए भाजपा यह बिल लेकर आई है। महाकुंभ में आस्था सबकी है। कोई पहली बार कुंभ नहीं हो रहा था। भाजपा ने ऐसा प्रचार किया कि 144 साल बाद यह कुंभ हो रहा है।
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उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि महाकुंभ में 30 श्रद्धालु मारे गए, और एक हजार लापता हैं, सरकार जान गंवाने वालों के नाम जाएं।
सपा प्रमुख ने कहा कि कुंभ हमारे लिए कारोबार का जरिए नहीं है। महाकुंभ की मौतों पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है। इस दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि मुझे ईद के कार्यक्रमों में जाने से रोका गया। देश मिलीजुली संस्कृति से बना है।
उन्होंने कहा कि भाजपा इस बिल के जरिए समाज को बांटने और ध्रुवीकरण की राजनीति करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वक्फ की जमीनों को अपने लोगों को सौंपने की साजिश हो रही है।
इस दौरान उन्होंने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि जो पार्टी ये कहती हो कि वह सबसे बड़ी पार्टी है। वह अभी तक अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं चुन पायी।
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वहीं भाजपा अध्यक्ष के चुनाव के बयान पर गृह मंत्री अमित शाह ने चुटकी लेते हुए कहा मेरे सामने जितनी भी पार्टियां हैं, उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव कुछ परिवार के लोग ही करेंगे। लेकिन हमें 12-13 करोड़ सदस्यों में से प्रक्रिया के बाद चुनना है। इसलिए इसमें समय लगता है। आपके मामले में तो ज्यादा समय नहीं लगेगा।
सपा चीफ ने कहा कि नोटबंदी के नाकामी के बारे में भी चर्चा होनी चाहिए कि अब भी न जाने कितना नोट निकल कर आ रहा है। नाकामी नोटबंदी की ही नहीं बल्कि बेरोजगारी, महंगाई की भी है। गंगा क्या साफ हो गई, यमुना क्या साफ हो गई।
गोद लिए गांव क्या गोद से उतार दिए, उनकी क्या स्थिति है। जिसके लिए फैसला होना हो। उस पर अहमियत न देना भी नाइंनाफी है।