नैनीताल में हाईकोर्ट के आदेश से जनता को मिलेंगे ये बड़े फायदे, जानिये क्या?

डीएन ब्यूरो

नैनीताल में हाईकोर्ट ने एक बड़ा आदेश दिया है। इससे आने वाले दिनों में जनता को काभी लाभ होगा। पढ़िये डाइनामाइट न्यूज़ की पूरी रिपोर्ट

पेड़ों के कटान पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
पेड़ों के कटान पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक


नैनीताल: ऋषिकेश-भानियावाला फोरलेन सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत 3400 पेड़ों की कटाई पर रोक लगाकर नैनीताल हाईकोर्ट ने न सिर्फ पर्यावरण की रक्षा की है, बल्कि जनता के लिए कई संभावित फायदे भी सुनिश्चित किए हैं।

डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार,  उत्तराखंड के पूर्व मुख्य वन संरक्षक जयराज ने इस कटाई को हाथी कॉरिडोर के लिए नुकसानदेह बताया। कोर्ट ने इस पर उनसे सुझाव मांगे हैं, ताकि परियोजना पर संतुलित फैसला लिया जा सके।

जनता को क्या होगा फायदा

पेड़ों की कटाई से जो वायु प्रदूषण बढ़ता था, वह फिलहाल रुक गया है। स्वच्छ हवा से लोगों का स्वास्थ्य सीधे तौर पर बेहतर होगा।  हाथियों और अन्य जंगली जानवरों की आवाजाही बाधित नहीं होगी, जिससे मानव-पशु संघर्ष की घटनाओं में कमी आएगी।  वनों की कटाई से भूस्खलन और बाढ़ जैसी आपदाएं बढ़ती हैं। पेड़ रहेंगे तो ऐसी घटनाओं का खतरा भी कम होगा।  वन विभाग ने कहा कि एक तिहाई पेड़ों को दूसरी जगह लगाया जा सकता है, ताकि विकास हो और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।

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कोर्ट में क्या हुआ?

गुरुवार 4 अप्रैल को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) के विशेषज्ञों की मदद से स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट मांगी है। सरकार ने कहा कि रिपोर्ट तैयार करने में चार सप्ताह का समय लग सकता है। तब तक पेड़ों की कटाई पर पूरी तरह रोक रहेगी। अगली सुनवाई 5 मई को होगी।

जनहित में दायर की गई याचिका

देहरादून निवासी रीनू पाल की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि प्रस्तावित चौड़ीकरण क्षेत्र हाथी कॉरिडोर के अंतर्गत आता है, जिससे जानवरों की आवाजाही और आवास दोनों प्रभावित होंगे। इससे पहले भी हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से शिवालिक एलीफेंट रिजर्व को संरक्षित घोषित किया गया था, जिससे अब इस क्षेत्र को भी बचाया जा सकेगा।

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आगे क्या हो सकता है?

5 मई को होने वाली अगली सुनवाई में विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि परियोजना किस तरह आगे बढ़ेगी। अगर पर्यावरण संतुलन और ट्रांसप्लांट का सही समाधान मिल जाता है तो यह एक आदर्श मॉडल बन सकता है, जहां विकास और पर्यावरण दोनों संतुलित रहें।

जनता को संदेश

पेड़ बचेंगे तो जीवन बचेगा। कोर्ट के इस फैसले से जनता को लंबे समय तक स्वास्थ्य, सुरक्षा और स्थिर पर्यावरण का लाभ मिलेगा।










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